एक्टिंग के जनून से मिली फिल्मी सफ़र की राह – कैफ़ खान

बॉलीवुड के रुपहले पर्दे पर रोमांटिक सीन, अभिनेताओं को मिलने वाली शौहरत,प्यार इज्ज़त देखकर और कमाई के बारे जानकर भारत के अधिकांश युवकों में कभी न कभी अभिनेता बनने की ललक जरुर पैदा होती है। यह अलग बात है कि इनमें कुछ युवाओं को ही अपनी कद-काठी, चेहरा-मोहरा, आवाज़, रंग-रुप और खुद पर भरोसा होता है कि वे ऐसा कर सकते हैं। वैसे भी अभिनय की डगर इतनी  आसान नहीं है। 
रूपहले पर्दे पर पहचान बनाना तो बहुत बाद के कड़ी है, सबसे पहले कैमरे से सामने खुद को साबित करने का मौका मिलना ही नामुमकिन नहीं, आसान भी नहीं होता। इसके लिए जिस लगन जनून और हिम्मत की  जरुर होती है, वे विरले अवश्य होते हैं। ऐसे ही एक 28 वर्षीय युवा हैं गाजियाबाद के काशिफ़ उर्फ कैफ़ खान, जिन्होंने अपनी मेहनत और होंसले के दम पर गाजियाबाद से निकालकर दिल्ली से मुंबई तक का सफ़र तय किया और आज बड़े पर्दे पर आकर खुद को नये को एक अभिनेताओं की फेहरिस्त में शुमार करा चुके हैं।
पारिवारिक बिज़नेस से कुछ अलग करके खानदान व शहर का नाम ऊंचा करने की चाह रखने वाले कैफ़ भी आम युवकों की तरह फिल्मों देखने का शौक़ रखते थे। फ़िल्म देखने के इस शौक ने कब उनके अंदर अभिनय करने का जनून जाग उठा, उन्हें खुद पता नहीं चला।
अभिनय के इस जनून ने उनके क़दम गाजियाबाद के संगीत गान्धर्व विद्यालय तक जरुर पहुंचा दिये और वे थियेटर करते-करते कुछ ही सालों में फिल्मों में एक्टिंग का ख्बाब पाले मायानगरी मुंबई जा पहुंचे। जहां वे आधा दर्जन से ज़्यादा छोटे पर्दे के सीरियल में काम करने के बाद बड़े पर्दे की दो फिल्मों में काम कर चुके हैं, जबकि तीसरी फिल्म की शूटिंग होने वाली है। उनकी कोई भी फिल्मी प्रष्ठभूमि न होने के बावजूद आज वे अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत के दम पर यह मुकाम पाया है। वे अब तक के अपने फिल्मी सफर के खुश व संतुष्ट हैं।
आत्मविश्वास से लवरेज क़ाशिफ़ उर्फ कैफ़ खान हाल ही में अपने परिजनों से मिलने अपने घर गाजियाबाद आये तो उनसे मुलाकात का मौक़ा मिला। औपचारिक बातचीत में कैफ़ खान में दूसरे नये-नये सिने कलाकारों की तरह कोई बनावटी व्यवहार नहीं था। वे अपने फिल्मी कैरियर को लेकर जिस तरह से आशावान और आश्वस्त दिखे, वह काफी सराहनीय था। उनमें गज़ब का आत्म विश्वास नज़र आया। कैफ़ का व्यवहार बिल्कुल भी फिल्मी न होकर एक परिपक्व व्यवहारिक अभिनेता जैसा था। 


बालीबुड में खासी दखल रखने वाले गाजियाबाद के ही रहने सिकंदर कुरैशी, जो खुद न केवल अभिनय के क्षेत्र में अपनी किस्मत आ चुके हैं, बल्कि कई फिल्मों के सह निर्माता भी रहे हैं, उनका कहना है कि कैफ़ खान में ग़ज़ब की प्रतिभा है। उसमें काम के प्रति जो लगन व जज़्बा है, वह बहुत ही कम कलाकारों में देखने को मिलता है। कैफ़ खान को यदि आने वाले समय का शाहरुख खान कहा जाए तो शायद ये कोई अतिश्योक्ति न होगी। 
कैफ़ में कहीं कोई निराशाजनक व नकारात्मक सोच दिखायी नहीं दी। करियर की अनचाही  समस्याओं को सामान्य चुनौती मानकर उनका हिम्मत से डटकर मुकाबला करने का दम रहने वाले इस अद्भुत अभिनेता ने कई सवालों के बड़ी ही बेबाकी से जबाब दिये। प्रस्तुत हैं कैफ़ खान से बातचीत के प्रमुख अंश:-


प्रश्न:आपके फिल्मी करियर की शुरुआत कब और कहां से हुई?
उत्तर: मेरे करियर की शुरुआत गाजियाबाद के गान्धर्व संगीत महाविद्यालय से शुरु हुई, जो बाद में दिल्ली के थियेटर से होती हुई मुंबई तक पहुंची। जहां मुझे छोटे पर्दे पर काम करने का मौका मिला और फिर बड़े पर्दे की फिल्मों में कई भूमिकाएं मिलीं।
प्रश्न: फिल्मों में पहला अवसर किस फिल्म में मिला?


उत्तर: मुझे पहला अवसर एक शार्ट फिल्म ‘मैजिक क्लिक’ में मिला, जिसमें मेरा छोटा सा, मगर दमदार व महत्वपूर्ण रोल था।
प्रश्न:आपको किन -किन सीरियल में काम करने का अवसर मिला है?


उत्तर: मैंने ‘हमसे है लाइफ’, प्रीत टूटे न कभी’, ‘कैसा ये बंधन’ जैसे सीरियल में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाई हैं ।
प्रश्न:आप गाजियाबाद- दिल्ली में बिताये समय व मुंबई के अपने अनुभव को किस रुप में लेते हैं?
उत्तर: इसमें कोई शक नहीं कि आज मुंबई ने मुझे अपना लिया है और वहीँ मुझे अपना भविष्य उज्जवल नज़र आ रहा है, लेकिन सच ये भी है कि मेरा पहला प्रेम गाजियाबाद ही है। ये न मेरी जन्मभूमि है, बल्कि यही की मिट्टी में पल पढ़कर मुझे परिजनों और संघर्ष के दिनों के दोस्तों ने ही हौंसला देकर मेरे सपनों को उड़ान दी।
गाजियाबाद में जहां मैंने अभिनय का ककहरा सीखा, वही दिल्ली के थियेटर में मुझे अपने सीनियर्स से अभिनय की बारीकियां सीखकर स्वयं को परिमार्जित करने का अवसर मिला। दिल्ली में थियेटर करने के दौरान मेरा मुंबई जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसलिए गाजियाबाद और दिल्ली मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।


प्रश्न: दिल्ली में थियेटर करने के दौरान आपने किन-किन नाटकों में भूमिका की?


उत्तर: सच कहूं, तो दिल्ली में थियेटर ने मुझे सही दिशा दिखायी और यहां के लोगों के सहयोग, साथ, व मार्गदर्शन से मैंने करीब 60 नाटक किये। इसमें कई नाटक तो नियमित ही हुआ करते थे। ऐसे नाटकों में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय व मेरा पसंदीदा ‘मातादीन’ था, जिसमें मेरा इसमें पुलिस इंस्पेक्टर का रोल हुआ करता था और यही रोल मेरी पहचान बन चुका था, जबकि गाजियाबाद में ‘शाकुंतलम’ सबसे ज़्यादा पसंदीदा नाटक रहा है।
प्रश्न:आपकी बड़े पर्दे की कौन-कौन सी फिल्में हैं?


उत्तर: मेरी बड़े पर्दे की फिल्मों में ‘नॉटी गैंग’, ‘फिर उसी मोड़ पर’ ‘कॉन्फेशन’, ‘मैजिक क्लिक’ हैं, जबकि आने वाली फिल्म ‘नुमाइश’ है, जिसमें मेरी लीड भूमिका है। फिल्म में रितिक रोशन भी साथ में हैं।
प्रश्न:आप हमारे पाठकों के लिये क्या संदेश देना चाहेंगे?


उत्तर: यही कि वे सपने जरुर देखें और उन्हें पूरा करने के लिये जी जान से मेहनत करें। यदि आपको खुद और खुदा पर विश्वास है तो निश्चय ही टेढ़े-मेढ़े रास्तों से ही सही लेकिन मंज़िल जरुर मिलेगी। यदि आप आशावादी हैं तो ऊपर वाला आपका हाथ अवश्य पकड़ेगा। मेरी यही दुआ है कि आप सब सफल व सुखद जीवन जियें, खुश रहें और अपने परिवार, समाज, व्यवसायिक कार्य और देश के प्रति निष्ठावान रहें व प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ते रहें। धन्यवाद।
आफाक़ खान ‘समीर’